nतल्ख़ियां साहिर लुधियानवी की सबसे पहली किताब थी और इसमें 67 गीत और ग़ज़लें हैं। कॉलेज के दिनों से ही साहिर ने शायरी शुरू कर दी थी और लोग इसे पसन्द भी करने लगे थे, लेकिन उनकी अलग पहचान तल्ख़ियां के प्रकाशन से ही बनने लगी। उर्दू में लिखी यह किताब बहुत लोकप्रिय हुई और इसके कई संस्करण छपे। 1958 में इसका हिन्दी रूपान्तर राजपाल एण्ड सन्ज़ से प्रकाशित हुआ। साहिर के चाहने वाले पाठकों की माँग पर अब इसका नया संस्करण प्रस्तुत है। साहिर लुधियानवी को &
nतल्ख़ियां साहिर लुधियानवी की सबसे पहली किताब थी और इसमें 67 गीत और ग़ज़लें हैं। कॉलेज के दिनों से ही साहिर ने शायरी शुरू कर दी थी और लोग इसे पसन्द भी करने लगे थे, लेकिन उनकी अलग पहचान तल्ख़ियां के प्रकाशन से ही बनने लगी। उर्दू में लिखी यह किताब बहुत लोकप्रिय हुई और इसके कई संस्करण छपे। 1958 में इसका हिन्दी रूपान्तर राजपाल एण्ड सन्ज़ से प्रकाशित हुआ। साहिर के चाहने वाले पाठकों की माँग पर अब इसका नया संस्करण प्रस्तुत है। साहिर लुधियानवी को &